बतियाँ पकवान व्यंजन के अंतर्गत आती है। त्यौहारों में तैयार की जाती है जैसे मकर संक्रांति, बसंत पंचमी, शिवरात्रि, तीजा (हरतालिका व्रत पर शंकर पार्वती का व्रत रखने वाली महिलाएँ बतियाँ, खुरमा, पपड़ियों के भोग लगाती हैं) महालक्ष्मी पूजन पर महिलायें तैयार करती हैं। अधिक मात्रा में बनाई जाती हैं ज्यादा समय तक रखने पर खराब नहीं होती इन्हें बच्चे, युवा रूचि से खाते हैं और वृद्धजन पिसवाकर खाते है क्योंकि नरम तो होती है पर थोड़ी कड़ी होती है। हिन्दु संस्कृति में प्रत्येक वर्ग समाज में पकवान के रूप में बतियों को घरों में महिलायें बनाती हैं । यह व्यंजन बुन्देलखण्ड में, चन्देलकाल के समय से प्रचलित हैं ।
सामग्री - बेसन, मोन देने तेल, सेंकने के लिए तेल । लाल मिर्च, पिसी हुई अजवाइन, नमक आवश्यकतानुसार ।
विधि - बेसन परांत में रखें । लाल मिर्च पाऊडर नमक एवं साफ की हुई अजवाइन तथा मोन देने तेल मिलावें । थोड़ा-थोड़ा पानी डालते जायें और गूँथलें ध्यान रहे गीला न होने पाये । जिस तरह पुड़ी का आटा गूँथा जाता है वैसे ही बतियाँ बनाने को बेसन गूँथा जाता है। थोड़ी देर गूँथकर रख देवें ऊपर से ढक देवें । ताकि सूखे नहीं । पन्द्रह मिनिट बाद पुनः गूँथे तेल लगाकर पटा पर लोईनुमा बनावें छोटी छोटी गोली बनावें हर गोली को पटा कर रखकर लम्बी लम्बी पटा पर घुमाते हुए बनाते जावें अंगुली के बराबर मोटी एवं लम्बी बनाई जाती है अंगुली से दुगनी लम्बाई कर बीच में मोढ़ देवें दोनों छोर आपस में जोड़ देवें इखट्टी बनाकर रखें । कढ़ाई में तेल गरम करें भजिया की तरह सेंकते जावें हलके गुलाबी रंग की होने पर निकालते जायें। खुले बर्तन में सेंक कर रखें ।
बतियाँ ठण्डी ही खाने में उपयोग की जाती है । खाने में स्वादिष्ट लगती हैं । बतियाँ हिन्दू पर्व में मेले लगते हैं तब आनंद लेते हुए खाते हैं सफर में या किसी तीरथस्थान पर बनाकर ले जाते हैं । विशेषतः तीजा, संक्रांति में उपयोग ज्यादा होता है।
पौष्टिकता -
बेसन - प्रोटीन ।
अजवाइन, लाल मिर्च - पाचन योग्य तत्व समाहित होते हैं