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डॉ. बलभद्र तिवारी

जन्‍म – 17 सितम्बर 1935 ई.

जन्‍म स्थान – ग्राम बलखोहा, सागर (म.प्र.)

जीवन परिचय –

योग्यता – पी-एच.डी., डी. लिट, पूर्व अध्यक्ष हिन्दी विभाग, सागर वि.वि. सागर पूर्व सचिव बुन्देली पीठ सागर वि.वि. सागर

रचना – बुन्देली काव्य संग्रह 1,2,3 , बुन्देली संस्कृति

नाटक – बुन्देली नाट्य साहित्य

अन्य – बुन्देली साहित्य का इतिहास , बुन्देली काव्य परम्परा 1, 2 , बुन्देली का नया काव्य , आधुनिक काव्य की व्यक्तिवादी भूमिका , बुन्देली लोक कथाएँ , बुन्देली कहानियाँ, राई (अंतिम)

सम्पादन – विष्णुदास और उनकी रामायण कथा , अग्रदास ग्रंथावली , छत्र विलास , सनेह सागर , देवीदास के कविन्त, जहूर बख्स की कहानियाँ , बुन्देली समाज और संस्कृति • सत्यकाम (एड्स पर आधारित)

उपन्यास – रुको द्रोपदी रुको , कस्बे का नरक , ओ मृगशिर , एक और इन्द्रप्रस्थ , काम योगी

डॉ. बलभद्र तिवारी ने हिन्दी / बुन्देली साहित्य में विपुल रचनाएँ की हैं। आपका लिखा उपन्यास रूको द्रोपदी बहु चर्चित है।

  • यह एक पौराणिक कथानक पर आधारित है।
  • इसकी नायिका का चित्रण वास्तव में पुराने आख्यान का एक सांकेतिक रूप में आज की नारी के स्वत्व, स्वाभिमान व धैर्य का समेकित वर्णन है। आज की भारतीय नारी भी अनेक विवर्त्तों घेरे में बँधी संघर्षशील है।
  • इस उपन्यास की भाषा-भावपूर्ण है।
  • इसकी शैली प्रभावी है।

इसके पात्र और सम्वाद कथानक के अनुरूप हैं। जो उपन्यासकार डॉ. बलभद्र तिवारी के लेखन के तद्नुरूप हैं।

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