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बुंदेलखंड विश्वकोश

गफूर तायर

जन्‍म – 1945 ई.

जन्‍म स्थान – सागर (म.प्र.)

जीवन परिचय –

कार्यस्थल –  दमोह (म.प्र.)

उपन्यास – किले का पिशाच

काव्य संग्रह – मैं फिर कुचला गया , गजल संग्रह

स्वतंत्रता पूर्व के समय में काव्य और गजलों के सृजन से समाज की चित्तवृत्ति को गफूर तायर ने अभिव्यक्ति दी। इसके साथ ही उपन्यास लेखन भी किया। आपका ‘किले का पिशाच’ एक उपन्यास है। जिसके विषय में संक्षिप्त जानकारी इस प्रकार है- यह एक तिलिस्मी ऐयारी उपन्यास है। इसकी कथावस्तु, कौतूहल, रहस्य और रोमांच पर आधारित है। जिसमें किले में दफनाये गए अकथ प्रपंचों, रहस्यों का चित्रण किया गया है। इस उपन्यास में कथानक के अनुरूप रहस्य-रोमांच की शैली में घटनाओं को प्रतिबिम्बित किया है। इस प्रकार उपन्यासकार पर देवकी नन्दन खत्री के ‘भूतनाथ’ का प्रभाव दिखाई पड़ता है। इसके पात्र कथा-क्रम के अनुरूप हैं। संवाद कथानक को आधार प्रदान करते हैं। इस उपन्यास में भारतेन्दु से लेकर द्विवेदी युग के संधिकाल का औपन्यासिक विधान देखने को मिलता है।

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