हरगोविन्द त्रिपाठी सक्षम साहित्यकार के साथ आप एक पत्रकार रहे हैं। इसीलिये आपकी लेखनी में जहाँ ‘तुलसीदल जैसी पवित्रता है तो आपके उपन्यास ‘धरती की बेटी में समाज की एक बेटी की समस्या को उकेरा गया है। उपन्यास की भाषा हिन्दी है। पात्र स्थानीय हैं। सम्वाद पात्रानुसार है। आपने अनेक ग्रंथों की समीक्षा की है।