हरिप्रसाद द्विवेदी ‘श्री हरि’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पूर्व के साहित्यकार रहे। इसीलिये आपके लेखन में समकालीन सामाजिक परिदृष्य परिलक्षित होते हैं। वैसे आप के साहित्य में पुरातन (पौराणिक) की झलक स्पष्ट है। आपने ‘शकुन्तला’ के आख्यान के माध्यम से नारी दशा एक दिशा को अपने उपन्यास में अभिव्यक्ति प्रदान की है, अन्य जानकारी उपलब्ध नहीं है।