हरिसेवक मिश्र का कवीन्द्र केशवदास के परिवार में जन्म हुआ। आपने अपने महाकाव्य में केशवदास के छंद रचना का समायोजन किया है। इस ग्रन्थ में शब्द-छन्द-वाक्य भावों का अच्छा तालमेल हुआ है। देखिये –
“चण्डी है प्रचण्ड सत्रु मुण्ड रुण्ड खण्डवै कौ,
मालपुन्ज कुमुदिनि कुम्हिलाइवे कौ
कैधौ अति तीछन किरन चन्द्र कर की।
परपुर या मन जराइवे कौ द्वार जाल,
निज पुर रच्छन कौ साखा देवतर की।
सेवक कविन की मनोरथ की सिद्धि राजै,
कर करवार श्री उदोत नरवर की।”
कविवर मिश्र ने छन्द-वृन्द सहित अपने आश्रयदाता की प्रशस्ति भी कर दी। इस प्रकार काव्य के विकास में इनका कुछ अपना अलग योगदान रहा। जो अन्य मिश्र कवियों से कुछ भिन्न है। हनुमान स्तुति का निर्माण कर एक राष्ट्र-भक्त नायक का देश के समक्ष चरित्र रखा और प्रेरणा दी।