कृपारामजन्म – सं. १५७० वि.रचना – हित तरंगिणी । जिसे कवि ने इस पदावली में इसे लिखने को बताया –सिधि – “निधि सिवमुख, चन्द्रलखि माघ सुद्ध तृतियासु । हित तरंगिणी हौ रचौ, कविहित परम प्रकासु।” आपकी भाषा सरल एवं सरस है। उदाहरण- “सीस महल में बसत हो, गहें भोर की त्रास। कुंज-कुटी में क्यों बचौ, मोतन की लखिवास। तौ लौ ठानैई रहै, सून पनौ प्यौ जान। जौ लौ चित्त ना सुनै, मेरी बांकी तान। लोचन चपल कटाक्ष सर, अनवारे बिसपूर, मन मृग बेधें मुनिन के, जन जन सहित बिसूर।” क्या इस लेख में कोई त्रुटि है? flag सुझाव / त्रुटि रिपोर्ट करें संबंधित लेख article हरीराम व्यास visibility9 article विष्णुदास visibility10 article केशवदास visibility8