मानस विश्वास का समस्त लेखन भक्ति और प्रभु के चरित्रगान पर आधारित है। आपकी सभी रचनाओं में यह परिलक्षित होता है। आपका प्रणीत उपन्यास ‘संकल्प और समर्पण’ में एक ही मूल मंत्र है कि यदि मनुष्य किसी कार्य करने काे दृढ़ निश्चय से संकल्पित होता है और इसमें पूर्ण समर्पण की भावना है तो उसे लक्ष्य की प्राप्ति अवश्य ही होती है। यही संदेश इस उपन्यास का सम्भाव्य है।