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महेश कुमार मिश्र ‘मधुकर’

जन्‍म – 15 जून 1941 ई.

जन्‍म स्थान संगीत गुरुकुल पकौरिया दतिया (म.प्र.)

जीवन परिचय – महेश ‘मधुकर’ साहित्य, संगीत और कला के मर्मज्ञ साहित्यकार थे। आपने साहित्य सृजन में अनेक उपलब्धियाँ प्राप्त की थी।

निधन – 23 अगस्त 2010

उपन्यास – अधिराज , दोषी कौन , कथा मुख (30.6.1959)

अन्य कृतियाँ – वृक्ष पुरान , बुन्देलखण्ड की मृदंग , वादक परम्परा , दतिया की दंत कथाएँ

काव्य – मधुकर शतक (बुन्देली कविताएँ)

‘अधिराज’ उपन्यास दन्तवक्र पुत्र करूषराज के पौराणिक कथानक पर आधारित है। इसमें दन्त वक्र (अधिराज) और भद्रा की प्रेम कथा है। कथानक में कसाव के साथ सामंजस्य है। भाषा पात्रानुसार है। सम्वाद परिस्थितियों के अनुकूल है। दन्तवक्र का भद्रा से बिछुड़ने के सम्वाद दृष्टव्य हैं।

दन्तवक्र- भद्रे मैं पत्थर नहीं हूँ। किन्तु विवश हूँ। मेरा हृदय तुम्हारी धड़कनों से स्पंदित है।”

भाषा-शैली – शिष्ट भाषा व उत्कृष्ट शैली में लिखे इस उपन्यास में संगीतमय शिववंदना है। उपन्यास में नारी शक्ति को पुरूष की प्रेरणा माना है। कथामुख उपन्यास महेश मधुकर जी का अन्य उपन्यास है जो 30 जून 1959 को लिखा गया यह अप्रकाशित है।

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