जन्म – 1 अप्रैल 1956 ई.
जन्म स्थान – मेरठ (उ.प्र.)
जीवन परिचय –
वर्तमान पता – 940 बी, सिविल लाइन्स, झाँसी (उ.प्र.)
पति – मोहन जी
उपन्यास – ययाति कन्या, माधवी प्रकाशन वर्ष 2016 ई.
निरूपमा जी का यह प्रथम उपन्यास है। जो सन् 2016 ई. को प्रकाशित हुआ। इसके विषय में संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है- यह एक प्राचीन पौराणिक घटनाप्रधान उपन्यास है। इसकी नायिका “माधवी है। जो हस्तिनापुर सम्राट ययाति की पुत्री है। यह एक मराठी लेखिका श्रीमती विजया जहाँगीरदार के उपन्यास “ययाति कन्या माधवी’ का भावानुवाद है। इसकी कथावस्तु प्राचीन ऋषि व सम्राटों के आख्यानों पर निर्मित है। महर्षि विश्वामित्र ने अपने शिष्य गालव ऋषि से गुरूदक्षिणा के रूप में आठ सौ शुभ वर्ण एवं श्यामकर्ण अश्वों को देने को कहा। जिसकी पूर्ति हेतु गालव ऋषि हस्तिनापुर महाराज नहुष-पुत्र ययाति से याचना करते हैं और ऐसे आठ अश्व प्राप्त करते हैं। किन्तु ययाति शेष अश्वों की प्राप्ति हेतु अपनी सौन्दर्यवती, चारूगोत्री पुत्री माधवी को सौंप इसके द्वारा महाराजाओं से शेष अश्वों की पूर्ति शाप से बचते हैं।
माधवी इस प्रकार अयोध्या, काशी, भोजनगर के महाराजाओं को पुत्र प्राप्ति कराती है। शेष बचे अश्वों की पूर्ति हेतु गुरू विश्वामित्र को मुनि गालब माधवी को सौंप देते हैं। अंत में विश्वामित्र से विमुक्त हो माधवी अपने पिता ययाति के पास लौटती है। किन्तु क्लांत, विश्रांत जीवन से विमुख वह ऋषि गालव के पास अंततः चली जाती है। यह सम्पूर्ण कथा बड़े ही कौशल से गढ़ी गई है। यह सम्पूर्ण कथा 90 पर्वों में वर्णित है। इस पूरी कथा में नारी अपने स्वत्व, अस्मिता के विवर्तों के विम्बों में चलती ‘गुरूदक्षिणा’ की पूर्ति की वस्तु बनने को असहाय होती है। उपन्यास के संवाद प्रभाव कारी हैं।