पालक में चना दाल को मिलाकर कढ़ी बनती है महाराष्ट्र की भाँति स्वाद बदलने के लिए बुन्देलखण्ड में भी महाराष्ट्रीयन कढ़ी का सेवन किया गया एक प्रदेश के राजा दूसरे प्रदेश में जब आते थे तब उनके आतिथ्य सत्कार में रसोई तैयार की जाती थी ऐसे ही अवसर पर पालक चना दाल का उपयोग कर कढ़ी व्यंजन का रूप दिया गया होगा। बुन्देलखण्ड में कम ही इसका प्रचलन है। मेरा प्रयास है नये रूप के व्यंजन का प्रयोग कर स्वाद बढ़ाने के लिए पालक चना कढ़ी का परिचय आप सभी से करवाना। यह कढ़ी पौष्टिकता लिए हुए एवं स्वादिष्ट होती है ।
सामग्री - दही, बेसन, पालक भाजी एक पाव चना दाल, पचास ग्राम हरी या लाल मिर्च, धनिया पिसी हुई, हल्दी, नमक, तेल, राई, मेंथी, जीरा, हींग, अदरक, लहसुन चार पोथी, एक प्याज ।
विधि - सर्वप्रथम चना दाल को धोकर रख देवें । फिर पालक भाजी को साफ कर धोयें और महीन काट लेवें कुकर के डिब्बे में नीचे के डिब्बे में चना दाल, ऊपर कटी हुई पालक भाजी रख देवें । पक जाने के बाद उतार लेवें ठण्डा होने पर कुकर खोलें । गंजी को आँच पर रखें तेल थोड़ा डालें तुरंत हींग, राई, जीरा, मेंथी दाना डाल देवें, प्याज किसकर, लहसुन, अदरक कुचलकर डालें हल्का गुलाबी होने पर हल्दी, मिर्च, धनिया पाऊडर डालें, मठा या दही में बेसन घोलें, दही बेसन घोल उबली हुई पालक चना दाल व मसाला भुंजने पर डाल देवें । पानी ऐसा डालें कि कढ़ी न पतली न गाढ़ी रहे । आधा घन्टा तक उबलने देवें । धीमी आँच पर किसी भी प्रकार की कढ़ी जितनी पक जाती है अर्थात उबल जाती है उतनी स्वादिष्ट लगती है । हरा धनियाँ पत्ता धोकर महीन काटकर डालें । लीजिए पालक चना दाल कड़ी तैयार भोजन के साथ परोंसे ।
पौष्टिकता - सभी प्रकार की कढ़ी में पौष्टिक तत्वों से युक्त खाद्य सामग्री का उपयोग किया जाता है। पौष्टिक तत्व निम्नानुसार हैं - लौकी, पालक, हरी धनिया, बेंगन, भिण्डी में विटामिन 'सी' कैल्शियम, खनिज लवण पाये जाते हैं । दही मठा में सभी पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं । आँवला में शुद्ध विटामिन 'सी' एवं कैल्शियम पाया जाता है । चना दाल, बेसन-प्रोटीन की मात्रा सर्वाधिक होती है ।
उक्त प्रकार की सभी कढ़ी किसी भी समय अवसर पर तैयार की जाती है । सामाजिक स्तर पर कढ़ी जैसे व्यंजन का ज्यादा महत्व है । विवाहोत्सव से लेकर हिन्दू धर्म में मृत्यु भोज में जिसे "दिन" कहते है अर्थात दाशमी भी कहीं-कहीं कहा जाता है कढ़ी जरूर मृत्यु भोज में प्रचलित है। सम्पूर्ण बुन्देलखण्ड में इसका चलन है।