गजल संग्रह है – खण्ड काव्य , यामिनी, दहेज, कब्रिस्तान, समर्पण, क्रांति शिला, अवन्ती बाई, रानी सारन्ध्रा
रमेश प्रसाद श्रीवास्तव एक अच्छे गीतकार, व्यंग्यलेखक, भक्ति काव्यों के लेखक होने के साथ अनेक खण्डकाव्यों के रचयिता हैं। आपका लिखा उपन्यास ‘झूठा प्यार’ वर्तमान में प्रेम की सच्चाई को परिभाषित करता है जिसमें स्वार्थ, संदेहों के विवर्तों के कारण घुटन विघटन से पारिवारिक विघटन में परिणत हो जाता है। यही संदेश इस उपन्यास का है।