हीरापुर के राजा हिरदेशाह लोधी ने 1842 के बुंदेला विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सागर व दमोह के लोगों ने उनका भरपूर साथ दिया। हिरदेशाह लोधी को जिन्दा या मुर्दा गिरफ्तार करने पर 10,000 रूपये का ईनाम रखा गया। 22 दिसंबर 1843 को उन्हें गिरफ्तार कर कर्नल स्लीमेन को सौंप दिया।
क्या इस लेख में कोई त्रुटि है?