चावल और मठा का संयुक्त रूप है महेरी । बुन्देली व्यंजन में महेरी प्रसिद्ध है किसी भी मौसम में महेरी का उपयोग किया जाता है। महेरी चन्देलकाल से भोजन में प्रचलित है ।
सामग्री - एक पाव चॉवल, दो किलो मठा, राई, जीरा, हींग, मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर, नमक, तेल, हरा धनिया ।
विधि - चॉवल साफ करके पानी में धोयें दस मिनिट तक पानी में फूलने देवें । फिर एक गंज में मठा, राई, हींग, मिर्च, हल्दी सहित बघार दें । साथ में चॉवल डाल देवें नमक डालकर चलाते जावें आग की आँच धीमी रखें तीस मिनिट तक उबालने देवें जब पूर्ण रूप से चॉवल घुल जायें तब गॅज नीचे उतार लेवें हरा धनिया पत्ती काटकर ऊपर से डालकर थाली में परोसें ।
पौष्टिकता - चॉवल-कार्बोहाइड्रेट, मठा-सभी तत्व एवं विटामिन 'सी' ।
महेरी पौष्टिक एवं ऊर्जा प्रदान करती है श्रमिक वर्ग को ताकत प्राप्त होती है। आहार में तृप्ति दायक रूचिकर व्यंजन है महेरी चन्देल काल से आरम्भ है ।