बेसन मिलाकर करेला की सब्जी अति स्वादिष्ट एवं रूचिकर हो जाती है जिन्हे करेला कदु लगते हैं वे लोग भी यह सब्जी खाते है । शक्कर की बीमारी के मरीज कच्चा करेला का रस पीते हैं उन्हे बेसनयुक्त करेला ज्यादा फायदेमंद होते हैं। करेला का सेवन शक्कर बढ़ाने वालों को रामबाण की तरह है ।
सामग्री - एक पाव करेला, आधा पाव बेसन, लहसुन, प्याज का मसाला, स्वादानुसार मिर्च, धनियाँ, हल्दी, नमक, राई, नींबू, एक या अमचूर का उपयोग कर सकते हैं
विधि - सर्वप्रथम करेला को पानी से धो लेवें छोटा-छोटा टुकड़ा काटें । नमक के पानी में 15 मिनिट के लिए भिगोकर रखें । तब तक सौ ग्राम बेसन कढ़ाही में थोड़ा तेल डालकर सेंक लेवें हल्का गुलाबी होने पर निकाल लेवें । लहसुन, प्याज पीसकर धनियाँ, मिर्च, हल्दी, नमक, मिलाकर रख लेवें । जिस बर्तन में पकाना है उसमें तेल डालें ज्यादा सा एक चम्मच राई का तड़का लगावें नमक पानी से करेला निकालकर कढ़ाही में डाल देवें पर्याप्त सिक जाने पर करेला निकाल लेवें । (जिस परिवार में लहसुन प्याज नहीं खाते वे बिना लहसुन प्याज के इसी विधि के अनुसार पका सकते हैं ) मसाला भुंजने के पश्चात् करेला डालें धीमी आँच में सेंकें । इसके बाद सिका हुआ बेसन डालें । भली भाँति मिला लेवें । करेला में बेसन चिपक जाता है खाने में स्वाद भिन्न होता है |
इसे बच्चे बूढ़े जवान सभी इस्तेमाल कर सकते हैं । करेला की सब्जी बरसात के समय ही लाभप्रद एवं स्वादिष्ट होती है । गरमी एवं कुवार आसपास में करेला खाने से बुखार आने की संभावना होती है। ऐसा बुजुर्गों का कथन है। कुवांर करेला कार्तिक दही, मरहो न तो पर हो सही । बेसन करेला की सब्जी में उतारते समय नींबू का रस या अमचुर
डाल देवें इससे कडुआहट समाप्त हो जाती है । सब्जी का स्वाद दूना हो जाता है ।
पौष्टिकता - प्रोटीन, खनिज लवण, आयरन, कैल्शियम, विटामिन 'सी' वसा आदि ।