उपन्यास – चमत्कार , एक मेघदूतम् और , वसीयत , एन एवीडेंस , बृन्दा और उसका बेटा , बेगानी शादी में
बद्रीनाथ श्रीवास्तव स्वतंत्रतापूर्व के लेखकों में अग्रगण्य हैं। आपकी रचनाओं में विविधता है। आपका लिखा उपन्यास बृन्दा और उसका बेटा बहुचर्चित है। जिसका विवरण इस प्रकार है। जो पुस्तक की प्रति पर आधारित है। यह एक ऐतिहासिक कालखण्ड में रचित उपन्यास है, इसका नायक बृन्दासिंह बुन्देला है।
अन्य पात्र – बृन्दासिंह का बेटा शिव , बृन्दासिंह की प्रेयसी जया , फूलसिंह , शिव की प्रेयसी जयंती , दलपति-खलनायक , नृत्यांगना-वही दिन
कथानक – इसमें तत्कालीन राजनीति में पनपते षड्यंत्रों का मौलिक चित्रण है। जो ओरछा के महाराजा वीरसिंह देव के राज्यकाल के द्वन्दों पर आधारित है। जिसमें सलीम (जहाँगीर) और महोबा, पृथ्वीपुर, महेवा, आगरा-दिल्ली, ग्वालियर आदि में घटित युद्धों का बड़ा रोचक वर्णन है। इसमें दलपति सिंह खलनायक है इसके साथ समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक रीति-रिवाज इस उपन्यास के कथानक में चित्रित है। उपन्यास की भाषा हिन्दी है। संवाद पात्रानुसार हैं।