ध्रुव शुक्ल स्वातन्त्र्योत्तर काल के साहित्यकार हैं। इसीलिये आपकी रचनाओं में तत्कालीन सामाजिक संचेतना की अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। आपने अपने काव्य में ‘हिचकी’ जैसी सांकेतिक काव्य प्रसून रचे हैं। आपके उपन्यासों में शहरी जीवन के विवर्तों का अच्छा चित्रण हुआ है। आपकी भाषा सरल हिन्दी है। ध्रुव शुक्ल जी ने समकालीन उपन्यास के कथा-विन्यास का प्रयोग अपने उपन्यासों में किया है। आपका साहित्यिक योगदान अप्रतिम है।