स्वतंत्रता संघर्ष काल के लेखन में एक मानवीय समावेशी भाव की रसमय धारा का आप्लावन देखने को मिलता है। वासुदेव आठले का सृजन उनके उपन्यास ‘मंगलपथ’ में भी समाज के कल्याण का उद्ता रहा। साप्ताहिक हिन्दुस्तान पत्रिका द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता में आपकी कहानी को प्रथम पुरस्कार मिला था। आपने सेवारत व्यक्तियों हेतु डॉ. हरीसिंह गौर रात्रिकालीन महाविद्यालय की स्थापना की। आपकी समग्र रचना संचेतनाओं का उद्रेक लगता है।