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बुंदेलखंड विश्वकोश

खंडन

जन्म  –  सं. १७४४ वि.

कविता काल  –  सं. १७९० वि.

जीवन परिचय

ग्रन्थ  –  भूषणदाम,  जैमिनी अश्वमेघ , नाम प्रकाश,  राजा मोहमर्दन की कथा , सुदामा चरित्र आदि।

आपका जन्म दतिया के कायस्थ परिवार में हुआ था। आपके काव्य में कृष्ण और ब्रज का बखान है –

           “विपत्ति संघातिनि है, दारिद्र की घातिनि है।

           द्वारिका के जातन उबारे गई तन ही।

           ‘खण्डन’ विसारे जिन चित्त तैन टारै यह।

           सम्पत्ति, विपत्ति की सुरति रहै मन ही।

           कहत सुदामा वह सामा की सकल सामा।

           जाहि देखि रीझि मौज करी श्याम घन ही।”

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