पूर्व सम्पादक ‘संगम’ पत्रिका इलाहाबाद ‘लोक वार्ता’ कुण्डेश्वर टीकमगढ़, म.प्र. 1944 में प्रकाशित की थी। कृष्णानंद गुप्त विद्वान विचारक लोकधर्मी साहित्यकार रहे। आपने अनेक ग्रंथों की रचना की है।
ग्रंथ –
बुन्देली कहावत कोश प्रकाशक उ.प्र. सूचना विभाग लखनऊ 1960 ई.
ईसुरी की फागें (सम्पादन)
बुन्देली भाषा और साहित्य -सन् 1990 ई. प्रकाशक राष्ट्रभाषा परिषद, पटना, बिहार
हिन्दुस्तानी कहावत कोश प्रकाशक-नेशनल बुक ट्रस्ट दिल्ली
शैलकश ‘गोर्की’ के उपन्यास का अनुवाद
बुन्देली शब्दकोश निधन के बाद प्रकाशित हुआ
हिन्दी उपन्यास ‘केन’
अंकुर (कहानी संग्रह)
गाँव का मेरुदण्ड
हृदय तरंग
मुक्ता
उपन्यास – केन यह एक ऐतिहासिक उपन्यास है
कथावस्तु – जिसमें कालिंजराधिपति ‘गंड’ और ‘धंग’ के ऐतिहासिक आधारों के साथ प्राचीन ‘कर्णवती’ नदी के अर्वाचीन नाम ‘केन’ आरन्यान सम्बन्धी नवीन उत्कर्ष का विवरण है। इस उपन्यास में लोक धारणाओं को लेकर बुन्देलखण्डी परिवेश में कहानी के अनुरूप चित्रण किया गया है। इतिहास के साथ राष्ट्र भावना को बड़े रचना कौशल के साथ सम्प्रेषित किया है। इस प्रकार ‘केन’ नदी पर आधारित यह ‘केन’ उपन्यास के इतिहास की अनूठी निधि है।