कृष्णानंद हुण्डैत गाँधी युग के साहित्यकार थे। आपके विचार देश-प्रेम, अहिंसा और स्वतंत्रता के गीतों में झलकते हैं। आपने गद्य, पद्य दोनों साहित्य विधाओं में लेखन किया। आपने हिन्दी / बुन्देली में साधिकार रचनाएँ की हैं। इसीलिये आपको ‘साहित्य वारिधि’ की उपाधि से अलंकृत किया गया है। आपकी प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं-
काव्य – माण्डवी (खण्ड काव्य) , विकल , बृजवासी , राज्यश्री , छलकते आँसू , मेरा मंदिर , दूर विजन में
कृष्णानंद हुण्डैत गाँधी विचारधारा के मानने वाले थे। आपके उपन्यास “जेल और घर” में उनके ऐसे ही विचारों का समावेश हुआ है। आप समाज सुधारक और हिन्दी भाषा के उन्नयन के लिये तत्पर रहे।
निधन – माघ पूर्णिमा सं. 2060 वि. 5.2.2004 ई. में हुआ।