उपन्यास – कच्ची ईंट बाबुल देरी न दइयो , तेंदू के पत्ता में देवता , मोए लै चल बलम रेता में। महेंद्र कुमार फुसकेले ने अपने उपन्यासों में नारी व्यथा की कथा के साथ मानवीय अवधारणाओं का खुलासा किया है। मैं तो ऊँसई अतर में भींजी, फूलवन्ती और मालती अपूर्ण उपन्यास।
कहानी संग्रह – कबूला, आत्महन्ता का पुरुष
बाल कहानी संग्रह – घूम री पृथ्वी घूम घूम
निबंध संग्रह – दशांग, प्रकाशन्तर, दधिसार, तीर्थंकर महावीर : एक अध्ययन
काव्य संग्रह – स्त्री तेरे हजार नाम ठहरे
मार्क्सवादी विचारधारा, दर्शन और सिद्धांन्तों के आदर्शों के अनुशीलन में संलग्न श्री फुसकेले का उपन्यास कच्ची ईंट बाबुल देरी न दइयो बहुचर्चित उपन्यास है जिसमें लोक-गीत की भावना का प्रदर्शन हुआ है उपन्यासकार महेन्द्र कुमार फुसकेले ने बुन्देलखण्डी समाज में नव विवाहिता के साथ नये परिवारी जनों द्वारा किया गया व्यवहार और उसकी दशा को आधार मानकर उसकी व्यथा का चित्रण किया है। उपन्यास की भाषा, भाव शैली तथा सम्वाद सब कथानक के अनुरूप हैं। वे प्रगतिशील लेखक संघ की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मंडल के सदस्य और इकाई के संस्थापक संरक्षक रहे। 12 अक्टूबर 2021 को उनका निधन हो गया।