वर्तमान पता – काव्या-चन्द्रशेखर वार्ड बीना जिला-सागर
पेशा – चिकित्सा विभाग (से. नि.)
काव्य (गजल) – गाँव के गेंवड़े (बुन्देली गजल संग्रह)
कथा साहित्य – ‘प्यास’ फिर कमाओ
उपन्यास – रोटी पुत्र
महेश कटारे जी का ‘रोटी पुत्र’ प्रथम उपन्यास है- यह एक सामाजिक उपन्यास है। लघेंचू व रतिया इस के मुख्य पात्र हैं। अन्य सहायक पात्र नन्दन सिंह, चन्दन सिंह आदि हैं। सभी पात्र ग्रामीण परिवेश के हैं। इसकी कथावस्तु भदावर के क्षेत्र के एक गाँव की है। जिसमें सार्वजनिक वितरण विभाग, आपसी झगड़े व गाँव के दबंगों की दबंगई के बीच लघेंचू एक सामान्य सेवक की गतिविधियों को लेकर गढ़ी कहानी है। कहानी यद्यपि पुरानी है किन्तु इसमें उपन्यासकार ने नव-सामंतवाद के विकसित रूप को प्रस्तुत किया है। यही इसकी विशेषता है। भाषा- सरल है और क्षेत्रीयता से प्रभावित है। संवाद- इसके पात्रों की आपसी संवाद की भाषा भदावरी और बुन्देली है।