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मैत्रेयी पुष्पा

जन्‍म – 30 नवंबर 1944 ई.

जन्‍म स्थान ग्राम सिकर्रा अलीगढ़ (उ.प्र.)

जीवन परिचय – मैत्रेयी पुष्पा की कर्म भूमि बुन्देलखण्ड है। आप की उच्च शिक्षा झाँसी के बुन्देलखण्ड महाविद्यालय में हुई। जहाँ मैत्रेयी को किताबी ज्ञान तो मिला ही साथ में यहाँ का परिवेश विद्यालयीन अनुभव से अवगत होना भी रहा। झाँसी के ग्रामीण अंचलों में व्याप्त वर्ग विभेद, नारी अस्मिता के टूटते-जुड़ते सम्बन्ध और जन-जातीय जीवन के ऊहापोह के यथार्थों ने पुष्पा जी को बहुत प्रभावित किया है जो आपके साहित्य-सृजन में परिलक्षित हुआ है।

साहित्य-सृजन – मैत्रेयी पुष्पा का सृजन कथा-साहित्य से शुरू हुआ है। इस काल में यथार्थवादी व अति यथार्थवादी उपन्यासकारों का एक विस्तृत तंत्र सामने आया जिसने प्रगतिवादी, नारी अस्मिता के साहित्य को आगे बढ़ाया। इनमें वामपंथी सोच का समावेश है। पुष्पा जी के उपन्यासों में यही सब की अभिव्यक्ति हुई है।

उपन्यास – मैत्रेयी पुष्पा के लिखे उपन्यासों की सूची लम्बी है। जो इस प्रकार है-

  • स्मृति दंश (1990 ई.)
  • बेतवा बहती है (1993 ई.)
  • इदन्नमम (1994 ई.)
  • चाक (1997 ई.)
  • झूठा नट (1999 ई.)
  • अल्मा कबूतरी (2000 ई.)
  • कही ईसुरी फाग (2004 ई.)
  • त्रिया हठ (2005 ई.)
  • अगन पाखी
  • गोमा हँसती है।
  • कस्तूरी कुंडल बसे (आत्म कथा)
  • विजन
  • गुनाह-बेगुनाह आदि है।

अन्य –

  • कहानी- लालमनियां, चिन्हा, पियरी का सपना आदि हैं।
  • आलेख- सुनो मालिक सुनो, चर्चा, खुली खिड़कियाँ आदि है।
  • आत्मकथा-दो भाग- • कस्तूरी कुंडल बसे और गुड़िया भीतर गुड़िया

इस प्रकार मैत्रेयी पुष्पा ने हिन्दी गद्य के समकालीन रूपों में लेखन किया है। परन्तु पुष्पा जी वास्तव में एक उपन्यासकार के रूप में साहित्य के इतिहास में प्रस्थापित हैं। उनके उपन्यासों में नारी अस्मिता को प्रधानता दी गई है। इसके साथ ही आपके  उपन्यासों में बुन्देलखण्ड के लोक जीवन एवं लोकरंजन की लोकानुभूति देखने को मिलती है। जिसमें उपन्यासकार मैत्रेयी ने शोषित, उपेक्षित, अभावग्रस्त समाज प्रमुखतः नारी अस्मिता की रक्षा हेतु लड़ने का साहस दिखाया है। जो उनके प्रमुख उपन्यासों में परिलक्षित है।

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