समकालीन साहित्य के क्षेत्र में राजेन्द्र अवस्थी जी का योगदान अग्रणीय है। म.प्र. के जबलपुर सम्भाग में जन्में बढ़े और शिक्षा ग्रहण कर पत्रकारिता को आपने अपना विकल्प चुना। आप धीर-धीरे आगे बढ़ते रहे और अंत में दिल्ली से प्रकाशित होने वाली प्रसिद्ध पत्रिका ‘कादम्बिनी’ के सम्पादक पद पर विभूषित हुये। इस प्रकार आप समाज, राजनीति से जुड़े यक्ष प्रश्नों को दिशा प्रदान करते रहे।
राजेन्द्र अवस्थी जी ने पत्रकारिता की कलावधि में आलेख व उपन्यास भी प्रणीत किये हैं। सन् 1985 ई. में प्रकाशित आपका उपन्यास “एक रजनीगंधा की चोरी” बहुचर्चित है। यह उपन्यास सन् 1985 ई. में लिखा गया। इसकी भाषा शैली प्रभावशाली है। इसके पात्र आधुनिक वर्गीय है। संवाद पात्रानुसार दिये गये हैं।
अन्य उपन्यास –
सूरज किरण की छांव
जंगल के फूल
जाने आवाज
मछली बाजार
इस प्रकार राजेन्द्र अवस्थी जी ने अपने उपन्यों द्वारा ग्रामीण-कस्वाई परिवेश को सही रूप में उकेरा है।