सुप्रसिद्ध रामदत्त ‘अजेय’ स्वतंत्रता काल के पूर्व के लेखक हैं। इसीलिये आपके उपन्यासों में ‘अकुलाहट’ सफलता की ‘कुलबुलाहट’ स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। ये अपने काल के पारिस्थितिक, राजनीतिक विमर्श के ‘दस्तावेज’ हैं। रामदत्त जी ने मेहनतकश लोगों के ‘श्रम का फल’ की गारंटी अपने उपन्यास में सुनिश्चित करती दिखाई हैं। इसके अतिरिक्त ‘अजेय’ अपने काव्य और व्यंग्य रचनाओं द्वारा समाज को जागृत करने का कार्य भी करते हैं। यही सब हिन्दी साहित्य में आपका प्रदेय है।