उपन्यास – क्रांति पथ , जय ओरछा , राजुल राजमति , आग और सुहाग , हरदौल की यश गाथा , जेबुन्निशा का सपना-शिवाजी , क्षिप्रा के तट पर
श्रवण कुमार त्रिपाठी के सभी उपन्यास ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित हैं। जिनका संक्षिप्त विवरण देने से स्पष्ट हो जाता है। बुन्देलखण्ड की अमर क्रांति का आधार 1857 की क्रांति है। चूँकि उपन्यासकार का निवास क्षेत्र महान क्रांतिकारी बानपुर राजा मर्दन सिंह के राज्याधीन रहा। मर्दन सिंह ने 1857 वीं क्रांति में अप्रतिम योगदान दिया है। सागर से बानपुर, झाँसी, कोंच-कालपी का पथ ही ‘क्रांतिपथ’ है। जहाँ क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबुआ दिये थे। हरदौल की यश-गाथा समस्त बुन्देलखण्ड की संचेतना का स्रोत आज भी बना हुआ है। जय-ओरछा में जय-विजय की गाथा के प्रमाण हैं तो उपन्यास मुगल बादशाह औरंगजेब की पुत्री का कथित शिवाजी का प्रेमाख्यान है आग और सुहाग-श्रवण कुमार त्रिपाठी का बहुचर्चित उपन्यास है।