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बुंदेलखंड विश्वकोश

भजिया

personडॉ. प्रेमलता नीलम sourceस्रोत: बुंदेलखंड के व्यंजन की वैज्ञानिकता

सामग्री - बेसन, आलू, प्याज, भाजी जैसे मैंथी, पालक, नौरपा (लाल भाजी), तुरइया, बेंगन (भटा) हरी या लाल मिर्च, हरा (फतकुली), धनिया पत्ती, नमक, सेंकने के लिए तेल ।

विधि - भजिया कई प्रकार के तैयार किये जाते हैं रूचि के भाजी के आलू एवं प्याज के तुरइया और भटा अनुसार (बेंगन) के अलग अलग तैयार किए जाते हैं। सब्जी को काटने के पहिले धोयें फिर काट लेवें आलू गोल पतले काटें प्याज छोटे छोटे टुकड़ों में काटें, तुरईया एवं भटा गोल पतले तथा भाजियों को अलग-अलग महीन काट लेवें । बनाने की विधि एक सी है सब्जियों को अलग से आसार देकर बनाना है, बेसन को गहरे बर्तन में नमक, मिर्च, हरी धनिया के साथ फेंट लेवें । कम से कम दस मिनिट फेंटे जिससे भजिया नरम व कुरकुरे बनेंगे । सर्वप्रथम आलू विधि निम्न है -आलू से बनाये गए भजिया आलू पकौड़ा भी कहे जाते हैं ।

आलू पकौड़ा - बड़ा आलू लेवें छिलका निकाल लेवें पानी से धोवें, गोल पतले काटें । फिटे हुये बेसन में एक-एक गोल आलू में बेसन लपेट कर गरम तेल में सेंक लेवें, एक से अधिक डालते जावें सेंककर थाली में निकालें। किसी भी चटनी के साथ परोंसे ।

बैंगन भजिया - बेंगन अर्थात भटा बुन्देलखण्ड में बैंगन को भटा कहते हैं। भटा को पानी से धो लेवें पतले आलू के समान गोल काटें । फिटे हुए बेसन में लपेट कर सेंके ।

तुरइया अथवा फतकुली - तुरइया एवं फतकुली एक ही हरी सब्जी है बुन्देलखण्ड में नाम अलग-अलग जगह भिन्न-भिन्न लिया जाता है । फतकुली को पानी से धो लेवें । आलू की तरह गोल काटें । फिटे हुए बेसन में लपेटकर गरम तेल में सेंक लेवें ।

भाजी के भजिया -
काटने के पहिले भाजी को पानी से धो लेवें तत्पश्चात पंसद के अनुसार भाजी को काटकर मसाले मिले बेसन में कटी हुई भाजी भली भाँति मिला देवें । रूचि के अनुसार अलग-अलग भाजी के या मिलाकर भी तैयार किए जाते हैं। मैंथी एवं पालक के भजिया अलग-अलग स्वादिष्ट लगते हैं। किसी भी प्रकार की भाजी के भजिया भाजी बड़ा भी कहलाते हैं, अंतर केवल गोल गप्पा जैसे आकार देने पर भाजी बड़ा कहलाते हैं तथा बेसन में मिलाकर बने आकार छोटा हो उसे भाजी के भजिया कहते हैं । भजिया खाने का मौसम ठण्ड एवं बरसात में होता है । इन मौसम में ज्यादा स्वादिष्ट लगते हैं। तेल में तर सेंके जाते हैं इस तेल की मात्रा अधिक होती है। गरमी के मौसम में गरिष्ठ हो जाते हैं। बेसन और तेल दोनों के पाचन में समय लगता है इसलिए तपन के कारण भजिया का सही समय ठण्ड एवं बरसात है। यूँ तो सभी मौसम में भजिया का उपयोग परिवार के सदस्यों की रूचि के अनुसार होता है । भजिया चटनी के साथ खाये जाते हैं । चटनी में आम, टमाटर, केंथा, इमली आदि ।

पौष्टिकता -
बेसन- कार्बोज, खनिज लवण
आलू - कार्बोज
बेंगन - खनिज लवण
भाजियों में – कैल्शियम
टमाटर - विटामिन 'सी'
फतकुली - कैल्शियम
तेल - वसा

भजिया का उपयोग नाशता तथा अतिथियों के सत्कार में किया जाता है। पाचनशील बनाने के लिए रूचि के अनुसार अजवाइन का उपयोग भी किया जाता है।

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