करौंदा छोटा बेरनुमा फल होता है बरसात के बाद आता है । चटनी और कलौंजी बनती है। भोजन को स्वादिष्ट बना देती है । चटनी का अर्थ है चट + नी चाटना । चाट-चाटकर खाना । चटनी महीन पिसती है जिसके चाटने का आंनद ही अलग होता है ।
सामग्री - 100 ग्राम करौंदा, दो लहसुन पोथी, हरी मिर्च, एक अदरक छोटी गाँठ, थोड़ा जीरा, हरा धनियाँ, आवश्यकतानुसार
नमक ।
विधि - करौंदा साफ पानी में धोयें कपड़े से पौंछकर चार टुकड़े में काटें बीच का बीज अलग कर देवें, लहसुन, हरी मिर्च, अदरक, धनिया पत्ती, जीरा एवं आवश्यकतानुसार नमक पत्थर की सिल एवं लोड़ा से महीन पीसें तत्पश्चात् भोजन की थाली में परोंसे । पत्थर के सिल लोड़ा से चटनी का स्वाद चौगुना बढ़ता है । आधुनिक उपकरण मिक्सी से वह स्वाद नहीं रह जाता । प्राचीनकाल में पत्थर की सिल पर ही चटनी एवं सब्जी के मसाले पीसे जाते थे । इसलिए भोजन में रसानुभूति विलक्षण होती थी ।
पौष्टिकता - करौंदा, हरी मिर्च, हरा धनियाँ में विटामिन 'सी' कैल्शियम ।