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समसगढ़

समसगढ़

भोपाल से 22 किलोमीटर दूर परंतु भोपाल के प्रसिद्ध बड़े ताल के दूसरे छोर पर स्थित रातीबड़ से मात्र 4 किलो मीटर दूर यह प्राचीन जैन क्षेत्र विद्यमान है।

पुरातत्व

यहाँ 18 फुट उत्तुंग तीर्थंकर शांतिनाथ की प्रतिमा कुन्थनाथ और अरहनाथ के साथ दर्शनीय है। कहते हैं कि यहाँ का निर्माता भी पाड़ाशाह था जिसने बुंदेलखंड के कई क्षेत्रों में ऐसी ही तीर्थंकर त्रिमूर्ति का निर्माण कराया है। समसगढ़ को श्रमणगढ़ का ही अपभ्रंश माना जाता है। आस-पास बिखरे जैन कलावशेषों से यह प्रतीत होता है कि कभी यहाँ श्रमण संस्कृति का गढ़ रहा होगा। यहाँ की कुछ मूर्तियाँ भोपाल के चौक मंदिर में ले आई गई हैं। परंतु समसगढ़ का विकास व्यवस्थित किया जाये तो सचमुच अच्छे जैन पर्यटन स्थल के रूप में उपयुक्त हो सकता है।

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