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अक्षर: ऐ

अक्षर 'ऐ' से शुरू होने वाली कहावतें

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ऐरे-नगैरे पचकल्यान1।

(1.घोड़े की एक किस्म। वह घोड़ा जिसके चारों पैर घुटनों तक शरीर के रंग से भिन्न हों और पैर का रंग थुचनी पर भी हो।) इधर-उधर के पालतू आदमी।

ऐसी कई कै धोई न छूटें।

ऐसी बात कहना जो मन में चुभ जाय।

ऐसी सुहागिन से तौ राँड़ई भले।

बहुत अहसान से कोई वस्तु मिले तो उससे तो न मिलना अच्छा।

ऐसी होतीं कातनहारी1, तौ काय-खाँ फिरतों आँग उघारीं।

(1.कातने वाली।) जो काम में चतुर न हो ऐसी स्त्री के लिए प्रयुक्त।

ऐसे जीबे से तौ मरबो भलो।

किसी के कोई अत्यन्त अनुचित काम करने अथवा बहुत दुःखी होने पर प्रयुक्त।

ऐसें न मरे तौ जहर से का मरे ?

किसी आदमी पर यदि कहने का असर न हो तो डाटने-डपटने या मारने से क्या होगा ?

ऐसे होते कंत तौ काय कों जाते अंत।

यदि किसी योग्य होते तो घर छोड़ बाहर क्यों जाते ?

ऐसों बंज साव न करै। दानो खाय लीद हग भरै।।

बनिया ऐसा व्यापार नहीं करता कि जिससे लाभ के बजाय उलटे हानि हो।