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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: झ

अक्षर 'झ' से शुरू होने वाली कहावतें

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झंडा गाड़बो।

पूर्ण रूप से अधिकार करना। प्रभाव जमाना। अपनी बात ऊँची रखना।

झरबेरी कौ काँटौ।

दुष्ट प्रकृति का आदमी। झरबेरी का काँटा अत्यन्त तीक्ष्ण और टेढ़ा होता है।

झल्लन खेती हल्लन न्याव।

अच्छी खेती के लिए थोड़ा-थोड़ा पानी और झगड़े के लिए शोरगुल चाहिए।

झाम झंपट, घी संपट।

डाँट-डपट कर किसी की वस्तु झपट लेना।

झूँठे के आँगें सच्चो रो मरै।

झूठे के आगे सच्चे की नहीं चलती।

झूँठे व्याव, साँचे न्याव।

विवाह झूठ बोल कर ही होता है। न्याय में सत्य से काम लेना पड़ता है।