अक्षर: झ
अक्षर 'झ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंझरबेरी कौ काँटौ।
दुष्ट प्रकृति का आदमी। झरबेरी का काँटा अत्यन्त तीक्ष्ण और टेढ़ा होता है।
झल्लन खेती हल्लन न्याव।
अच्छी खेती के लिए थोड़ा-थोड़ा पानी और झगड़े के लिए शोरगुल चाहिए।
झाँसी गरे की फाँसी, दतिया गरे की हार। / ललतपुर कबहुँ न छोड़िए, जब लग मिलें उधार।।
ललितपुर में किसी समय रुपये का लेन-देन बहुत होता था।
झूँठे व्याव, साँचे न्याव।
विवाह झूठ बोल कर ही होता है। न्याय में सत्य से काम लेना पड़ता है।