अक्षर: थ
अक्षर 'थ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंथुरमोलू और दुधार, लमथनू और नैनवार।
गाय सस्ती हो और दुधार भी हो, लंबे थनों की हो, और अधिक घी वाली हो।
थोरी कई कबीरदास, भौत कई संतन।
कबीर ने थोड़े में ही सब कुछ कह दिया। दूसरों ने उसे और बढ़ाया।
थोरी करै सो अपुन कों, भौत करै सो गैर कों।
खेती थोड़ी ही अच्छी होती है। बहुत करने से उसका सँभालना कठिन होता है।
थोरे में मजा है।
कोई भी वस्तु थोड़ी खाने में अच्छी लगती है। किसी से थोड़ी बात करने में ही सार है।
थोरो पड़े सो हर सें गये। भौत पड़े सो घर से गये।।
किसान का लड़का पढ़ा अच्छा नहीं। थोड़ा पढ़े तो स्कूल की हवा लग जाने से खेती के काम का नहीं रहता, और बहुत पढ़ जाय तो नौकर होकर घर से बाहर चला जाता है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य।