मोहनजन्म – सं. १६२० वि.स्थान – ओरछाकविता काल – सं. १६६० वि.जीवन परिचयमोहन कायस्थ महाराज जुझार सिंह के आश्रित दरबारी कवि थे। आपने उस काल का चित्रण अपने काव्य में बड़ी कुशलता से किया है। महाराज जुझारसिंह के अनुज कुँवर वीर हरदौल की वीरता का बखान अपनी कविता में किया है। “अतर सिसया मुस्क, अम्बर कपूर आदि, मृतका में अरगजा, मिलौनी भाग तीन है चारहू किनारन पै मोहन गुलाब बेला, केतकी निबरिया हौज पानी की सनि है। फूलबाग मध्य में अखाड़ौ सुहाय रहौ, देव गंधर्व एक उतरौ नवीन है। बरस त्रयोदस में जूझकें अड़ाईपार। वीर हरदौल जू ने जीत बस कीन है।” क्या इस लेख में कोई त्रुटि है? flag सुझाव / त्रुटि रिपोर्ट करें संबंधित लेख article कृपाराम visibility10 article हरीराम व्यास visibility10 article विष्णुदास visibility11