सम्पादक – सरस्वती (1951-55 ई.) , बाल सखा , म. प्र. संदेश आदि
उपन्यास – उड़ते पत्ते , ज्वार भाटा , दीपदान , संकल्प , मन की पर्तें , हवा का रुख
काव्य – रानी दुर्गावती (खण्ड काव्य)
कहानी – अपना पराया , अभिशेष , आल्हा ऊदल
देवी दयाल चतुर्वेदी स्वातन्त्र्य संग्राम युग के प्रतिनिधि साहित्यकार हैं। अतएव उनके साहित्य, उपन्यास, कहानी व काव्य में समकालीन समाज की दशा का चित्रण किया है। आपने अपने खण्ड काव्य ‘दुर्गावती’ में रानी दुर्गावती की कहानी, आल्हा ऊदल के शौर्य का चित्रण कर तत्कालीन समाज की अभिव्यक्ति दी है।
उपन्यासकार देवी दयाल चतुर्वेदी ने अनेक उपन्यास लिखे जिनमें उड़ते पत्ते, ज्वार भाटा, दीपदान, संकल्प, मन की पर्तें तथा हवा का रुख आदि का उल्लेख मिलता है। उपन्यासों के नाम से उसके साहित्य विन्यास की जानकारी मिलती है। उपन्यासों की भाषा सरल हिन्दी है इनके कथानकों की रचना विषयानुसार गढ़ी गई है। संवाद पात्रानुसार हैं। हिन्दी साहित्य में आपका अप्रतिम योगदान है।