बुन्देलखण्ड में पापड़ के साथ भोजन की थाली में बिजौरा अवश्य परोसा जाता है । भोजन की थाली में संतुलित आहार के रूप में दाल, चॉवल, सब्जी, चटनी, आचार, सलाद, पापड़, दही या रायता, गर्मी के मौसम में इमली, आम का पना इतने व्यंजन के बाद यदि थाली में बिजौरा नहीं परोसा गया तो भोजन थाली अपूर्ण मानी जाती है ।
सामग्री - सफेद तिल एक किलो, भूरा कुमड़ा मध्यम साइज का, एक लाल गीली मिर्च, इच्छानुसार नमक ।
विधि - भूरा कुमड़ा को काटकर किस लें। किसकर छन्नी या कपड़े में रखकर कुमड़े का पानी निकालें, पन्द्रह बीस मिनिट को रख देवें । तिलि को एक दिन पहिले साफ करके धोयें, सुखायें तिलि से पानी पूर्णतः सूख जावें तब किसा हुआ कुमड़ा मिक्स करें स्वादानुसार नमक एवं मिर्च डालें कुमड़ा के बीज अवश्य डालें । छोटी-छोटी कुचइया का आकार देकर तेज धूप में सूखने रख देवें पर्याप्त निर्जलीकरण होने पर बंद डिब्बे में रखें । पापड़ की तरह इन्हें तलें और भोजन की थाली में रखें। बीज उसी में चिपका जाता है खाने में स्वादिष्ट लगता है। बीजायुक्त होने के कारण इसका नाम बिजौरा पड़ा ।
पौष्टिकता - वैज्ञानिक दृष्टि से वसा, प्रोटीन, कार्बोज, खनिज लवण, आयोडीन की पूर्ति भोजन में होती है, आवश्यकतानुसार कैलोरी प्राप्त होती है पाचन में सहायक होते हैं ।