मिष्ठान व्यंजन के अंतर्गत आते हैं। गड़िया घुल्ला बुन्देलखण्ड का बहुप्रचलित मिष्ठान है । मकर संक्रांति के मेला पर विशेष मिठाई वाले इसे तैयार करते हैं इसमें कई प्रकार चित्रों के साँचे बने होते हैं। जिस पर शक्कर की चासनी बनाकर ढाले जाते हैं। लड़के के विवाह के पश्चात लड़का वाले वधु पक्ष के घर यह मिष्ठान लेकर जाते हैं, यह लम्बी माला बनी होती है दुकानदार सामने टाँगकर रखते हैं कुछ पीस खुले रहते हैं गड़िया घुल्ला मिष्ठान आपसी प्रेमभाव एवं रिश्तों को मजबूत करने के प्रतीक हैं। जब वर पक्ष यह लेकर वधुपक्ष के यहाँ जाते हैं तब वधु पक्ष से भी इसी का उपहार कुछ नकद राशि रखकर भेंट किया जाता है । लोक व्यवहार की परम्परा का निर्वाह आज भी गाँवों में होता है। मधुर मिलन सहृदयता के प्रतीक है "गड़िया घुल्ला” फूल की माला की तरह स्नेह के धागे में पिरोये जाते हैं साले बहनोई को और समधी को यह माला पहनाते हैं । इससे रिश्ते नातों मे दृढ़ता आती है। रंग बिरंगे रंगों से रंगे सजे हुए होते ।
सामग्री - शक्कर, विविध खाने के रंग, धागा, विविध आकृति के साँचे, घी । एक किलो शक्कर में एक कप पानी डालकर चासनी तैयार करें । जितने में रंग मिलाना हो उतनी चासनी अलग बनायें । साँचा के अंदर घी का हल्का लेपकर दें फिर साँचे में चासनी भर देवें । ठण्डे स्थान पर रखें थोड़ी समय बाद सूखने लगते हैं तब साँचा पलट के रखें आकृति युक्त पीस निकल आवेगें और साँचा अलग हो जायेगा । आकृतियाँ ऐसी होती हैं कि धागा बाँधने की गुंजाइश रहती है। बीच में छेद भी होता है जिससे धागा जाने के लिए सुविधा हो । रंग बिरंगी गड़िया घुल्ला तैयार दुकानदार किलोग्राम में देता है दो सौ पचास ग्राम से लेकर एक किलो तक की मालायें होती हैं । इसका उपयोग होती, संक्रांति के समय किया जाता है। बच्चे बड़े चाव से खाते हैं । शक्कर में कार्बोज की मात्रा होती है कार्बोज शक्तिवर्धक होता है।
पौष्टिक तत्व - शक्कर में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है । गड़िया घुल्ला में 100% होता है ।