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डॉ. नौनिहाल गौतम

डॉ. नौनिहाल गौतम का जन्म मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के जलालपुरा ग्राम में 15 जनवरी 1984 को ब्राह्मण परिवार में हुआ । इनके पिता श्री बद्रीलाल गौतम तथा माता श्रीमती रुक्मणी गौतम हैं। दो भाई तथा चार बहिनों में ये सब से छोटे हैं। इनके बड़े भाई श्री इन्द्रप्रकाश गौतम अंग्रेजी के शिक्षक हैं।

इन्होंने ग्राम जलालपुरा की पाठशाला से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। शेष विद्यालयीन शिक्षा श्योपुर नगर के शासकीय विद्यालय में तथा स्नातक स्तर की शिक्षा श्योपुर नगर के ही शासकीय महाविद्यालय में सम्पन्न हुई। उच्चशिक्षा हेतु ये ग्वालियर पहुँचे जहाँ जीवाजी विश्वविद्यालय में संस्कृत

विषय में स्नातकोत्तर कक्षा में प्रवेश लिया। इन्हें जीवाजी विश्वविद्यालय की एम.ए. संस्कृत परीक्षा में प्रथम स्थान के लिये सावित्री आप्टे स्वर्णपदक तथा विश्वविद्यालय के कला संकाय में सर्वोच्च स्थान हेतु विश्वविद्यालय स्वर्णपदक महामहिम राज्यपाल द्वारा प्रदान किये गये। इन्होंने अध्ययन जारी रखते हुए यू.जी.सी., नई दिल्ली की नेट-जे. आर. एफ. परीक्षा दो बार उत्तीर्ण की जिससे इन्हें जीवाजी विश्वविद्यालय से पीएच.डी. के लिए फैलोशिप प्राप्त हुई। इन्होंने राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, दिल्ली से साहित्यशास्त्र में आचार्य उपाधि प्राप्त की। इन्होंने अपनी पीएच.डी. उपाधि संस्कृत विद्वान् एवं कवि डॉ. बालकृष्ण शर्मा जी के निर्देशन में प्राप्त की।

इन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में जीवाजी विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में एम.ए. संस्कृत कक्षाओं में अध्यापन आरम्भ किया। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पी. एस. सी.) से चयनित होकर इन्होंने वहाँ कुछ समय सेवा की। 2013 से डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के संस्कृत विभाग में सहायक आचार्य के रूप में नियुक्त होकर वर्तमान में यहीं अध्यापन में संलग्न हैं।

इनकी 8 पुस्तकें, राष्ट्रीय/अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर 100 शोधपत्र तथा आलेख, पुस्तक समीक्षाएँ, पुस्तकों में भूमिकाएँ, सम्पादकीय, मौलिक संस्कृत रचनाएँ, कहानी-कविताओं के संस्कृत अनुवाद साहित्य अकादमी, दिल्ली जैसी प्रतिष्ठित संस्था की पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।

ये भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं में की-नोट स्पीकर, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, सत्राध्यक्ष, रिसोर्स पर्सन के रूप में 50 से अधिक व्याख्यान दे चुके हैं। ये देश भर में आयोजित राष्ट्रीय/ अन्तरराष्ट्रीय स्तर की 100 से अधिक संगोष्ठियों में शोधपत्र का वाचन तथा प्रतिभागिता कर चुके हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की शास्त्रार्थ प्रतिस्पर्धा में प्रतिभागिता की है तथा ये राज्य स्तरीय शास्त्रीय स्पर्धाओं के निर्णायक भी रहे हैं। राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति (आ.प्र.) द्वारा आयोजित संस्कृतयुवलेखकसम्मेलनम् में मौलिक कथापाठ तथा साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मौलिक संस्कृत काव्यपाठ तथा बीज भाषण कर चुके हैं। ये भारत के लगभग सभी राज्यों की शैक्षणिक यात्रा कर चुके हैं। इसके साथ ही शासकीय अनुदान से शैक्षणिक विदेश यात्रा कर चुके हैं।

ये लगभग 20 राष्ट्रीय/अन्तरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों, रिफ्रेशर कोर्स, ओरिएंटेशन प्रोग्राम, एफ. आई. पी. में संयोजक आदि की भूमिका का निर्वहन कर चुके हैं।

ये जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट तथा अम्बाह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अम्बाह (म.प्र.) के संस्कृत अध्ययन मण्डल के सम्मानित सदस्य रह चुके हैं। ये सागरिका समिति, नाट्य परिषद्, संस्कृत परिषद्, ए आई ओ सी, बी ओ आर आई, पुणे, श्रीकृष्ण प्रणामी स्वाध्याय पीठ के सदस्य तथा महाकवि भवभूति शोध एवं शिक्षा समिति के सह सचिव हैं। ये सागरिका तथा नाट्यम् पत्रिकाओं के सम्पादक मण्डल के सदस्य हैं। ये विभिन्न अवसरों पर डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के संस्कृत विभाग अध्यक्ष के प्रभार का निर्वहन कर चुके हैं। ये पाण्डुलिपि केन्द्र के समन्वयक हैं। इनके निर्देशन में 3 शोधार्थी शोधकार्य कर रहे हैं तथा 2 शोधार्थी पीएच.डी. उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। ये विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधप्रबन्धों के मूल्यांकन कर्ता तथा मौखिकी परीक्षक रहे हैं। संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति हेतु इन्हें विषय विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जाता है। ऑल इण्डिया रेडियो, दिल्ली से इनका साक्षात्कार प्रसारित हो चुका है।

डॉ. गौतम संस्कृत के गंभीर अध्येता हैं। अध्यापन के प्रति इनका सहज आकर्षण है। इनके द्वारा पढ़ाए गये छात्र विभिन्न विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं।

अपनी विद्वत्ता एवं प्रभावी व्याख्यान शैली से देश भर में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके डॉ. गौतम को शिक्षा एवं संस्कृत सेवा की करने के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मान प्रदान किये गये हैं जिनमें साहित्य सागर सम्मान (ओडिशा), प्रतिभा सम्मान, स्वामी विवेकानन्द युवा सम्मान, संस्कृत सेवी सम्मान तथा पं. गोविन्द प्रसाद शास्त्री सम्मान उल्लेखनीय हैं।

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