बुन्देलखण्ड में उड़द, मूंग, चनादाल से निर्मित भोज्य पदार्थ को बरी अर्थात "बढ़ी" कहते हैं दाल को फूलने डालना पीसना मसाले मिलाकर तेज धूप में सुखाकर रखना पूर्ण रूप से निर्जली कर लम्बे समय तक बंद डिब्बे में संरक्षित रखकर सब्जी में उपयोग किया जाता है। बरी की सब्जी स्वादिष्ट लगती है यहां तक कि नाम के सुनते ही मुँह में पानी आ जाता है जिसे बुन्देली गृहिणी बड़े रोचक तरीके से तैयार करती है। सूख जाने के बाद पौष्टिक तत्व बरी में पाये जाते हैं यह सब्जी रसीली बनती है इसका रस सूप की तरह स्वादिष्ट लगता है। बुन्देलखण्ड के प्रत्येक परिवार में 'बरी' की सब्जी यथासमय किसी भी मौसम में भोजन के रूप में उपयोगी सिद्ध है।
सामग्री - उड़द छिलका या बिना छिलका धुली दाल, भूरा कुमड़ा, लाल गीली या सूखी मिर्च, हींग, जीरा, अदरक आवश्यकतानुसार ।
विधि - सर्वप्रथम दाल को साफ करें। कम से कम आठ घंटे पानी में भिगोयें । फूलने के बाद पुनः पानी में धोयें फूली दाल को धोते समय ही हाथ से मसलते जावें छिलका उतर जाएगा ऐसा बार-बार करने पर दाल पूर्णरूप से साफ हो जाएगी तत्पश्चात पत्थर की सिल बट्टा से पीसें। आधुनिक पद्धति में चक्की एवं मिक्सी से दाल पिसवाई जाती है किन्तु इस पद्धति में दाल गीली हो जाती है। पिसी हुई दाल में कुमड़ा किसकर अदरक, मिर्ची, जीरा, हींग को पीसकर दाल में मिलायें । दाल को भली-भांति फेंट लें ताकि एक सम जाये । तेज धूप में साफ चादर या मोटा कपड़ा बिछा कर मीडियम आकार के गोल बनाकर चादर पर डालते जावें तीन से चार दिन में बरी पूर्णरूप से सूख जाती हैं । 'बरी' बनाने का समय दीपावली के बाद ग्यारस पूजन के बाद से आरंभ होता है। ऐसी मान्यता है कि हिन्दी पूस मास में 'बरी' का काम नहीं किया जाता यदि पूस मास के पूर्व पिसी हुई दाल को महिला अपने हाथ से स्पर्श कर लेगी तो वह पूस में बरी का कार्य आरंभ कर सकती है इसमें वैज्ञानिकता यह है कि पूस माह में तेज सूर्य किरणें नहीं पड़ती तथ बादल छा जाने के कारण निर्जलीकरण की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती, जिससे उड़द दाल में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तत्व खमीर में परिवर्तित होने लगते हैं और 'बरी' का स्वाद बदल जाता है रंग भी बदला दिखाई देता है । अतः वातावरण उचित न होने से कुछ मान्यतायें प्रचलित की गई हैं। बुन्देलखंड में उड़ददाल की 'बरी' बच्चा को जन्म देने वाली महिला को जब प्रथम बार छठी के दिन हल्दी चांवल खाने दिया जाता है उसी वक्त बरी की रसीली सब्जी महिला को दी जाती है इससे महिला के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है पाचन शक्ति बढ़ती है। बरी के माध्यम से विटामिन डी प्राप्त होती है ।
पौष्टिक तत्व - उड़द-कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, कुमड़ा- कार्बोहाइड्रेड, अदरक हींग, जीरा, मिर्च, खनिज लवण ।