भाई अब्दुल गनी ने रतौना ग्राम में 1920 ई. में खोले जाने वाले कसाई खाना का तीव्र विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि 'किसी भी गाय का सर काटने के पहले मेरा सर काटना पड़ेगा'। उन्होंने सागर में 1920, 1930 एवं 1942 के आन्दोलनों में भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
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