गेहूं आटा और बेसन मिलाकर हलवा बनता है जो स्वादिष्ट लगता है। अतिथि सत्कार में तब बनाया जाता है जब सूजी या गाजर न हो तथा बाजार दूर हो, घर में कोई सदस्य दूर बाजार लेने जाने वाला न हो । बुन्देलखण्ड में प्रायः गाँव अंदर की तरफ हैं सप्ताह में एक बार बाजार लगता है। किसी पास के बड़े कस्बे में तब किराना इत्यादि सामान लिया जाता है । आकस्मिक अवसर पर यह हलवा ज्यादा लाभकारी होता है और बुन्देली गृहिणी का हाथ हो तब स्वादिष्ट रोचक क्यों न होगा ।
सामग्री - एक पाव गेहूं आटा, सौ ग्राम बेसन, सौ ग्राम घी, एक सौ पचास ग्राम शक्कर, इलायची, चिरौंजी, काजू, किशमिश, नारियल गरी ।
विधि - सर्वप्रथम कढ़ाही को आँच पर रखें पहिले बेसन भून लेवें, तत्पश्चात् आटा भूंजे दोनों को मिला देवें कढ़ाही में पुनः घी डालें गीला हो इतना पानी डालकर गरम करें, शक्कर साथ में डालें, पानी में खौल आने पर बेसन एवं आटा डालें शेष घी डालें, झरिया से नीचे ऊपर करते हुए सेंकते जावे पानी सूखने पर घी की स्निग्धता दिखाई देगी तब समझे हलवा तैयार । शुरू में इलायची दाने डाल देवें । तैयार होने पर प्लेट में सजाकर ऊपर से मेवा डालें खाने में परोसें ।
पौष्टिकता - गेहूं आटा, बेसन-प्रोटीन, घी, नारियल-वसा, शक्कर, चिरौंजी-कार्बोज, किशमिश-विटामिन, काजू-प्रोटीन । पौष्टिक तत्वों से युक्त मीठा व्यंजन में कुछ तत्व ऐसे होते हैं जो वसा जैसे पदार्थ को शोषित कर पचने योग्य बनाते हैं
इसलिए मेवा का प्रयोग होता है इसके अतिरिक्त नाश्ता में हलवा का उपयोग करने से दोपहर के भोजन तक के लिए शारीरिक श्रम करने वालों को ऊर्जा मिलती रहती है शक्तिदायक, स्वास्थ्यवर्धक में सहायक है "हलवा" ।