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बुंदेलखंड विश्वकोश

सुपोषण तथा कुपोषण के लक्षण

personडॉ. प्रेमलता नीलम sourceस्रोत: बुंदेलखंड के व्यंजन की वैज्ञानिकता
शरीरसुविकसितठिगना, अपर्याप्त रूप से विकसित शारीरिक दोष ।
भारऊँचाई तथा आयु के अनुसार लगभग औसतअपर्याप्त भार साधारणत: 10% या इससे भी अधिक, सामान्य भी हो सकता है, आवश्यकता से अधिक भार हो सकता है ।
मांसपेशियां त्वचा तथा रंग रूप उपचर्म वसासुदृढ़ तथा सुविकसित चिकनी व स्वस्थ रंग की सुन्दर त्वचा उत्तम परम ।छोटी तथा अविकसित, ढीली- ढाली झुर्रियाँ युक्त, पीले रंग की चिपचिती भूरे रंग की दूषित साधारणतः इसका अभाव ।
आसनउत्तम, सिर सीधा तना हुआ सीना उठा हुआ, कंधे सपाट अन्दर की ओर, लचीले कदमथकान युक्त आसन, कंधे झुके हुए, सपाट एवं सिकुड़ा सीना, उभरा हुआ उदर, आगे झुका हुआ सिर ।
बालचिकने तथा चमकीलेखुरदरे तथा चमक रहित ।
नेत्रकान्तिमय, नीचे की ओर काले वृत्त नहींकान्तिहीन, नीचे के ओर काले वृत्त ।
चेहरे के भावप्रफुल्लित मुद्रा तथा सावधान किन्तु चिंता रहित ।सावधान किन्तु चेहरे पर तनाव, चिन्तित निर्जीव सा तथा सुस्त
श्लैष्मिक झिल्लीपलकें, मुंह तथा जीभ स्वच्छ पीली एवं लालिमा लिए हुए ।
स्वभावउत्तम प्रकृति तथा जीवन से परिपूर्ण ।चिड़चिड़ा, भयभीत, हतोत्साहित शीघ्र घबराने वाला, सरलता से थकने वाला, उदासीन, एकाग्रचित करने में असफल
क्रियाकलापशारीरिक एवं मानसिक रूप से क्रियाशीलशारीरिक एवं मानसिक शक्ति का अभाव ।
निद्रागहरी ।निद्रा आने में कठिनाई, हल्की नींद ।
निष्कासनउत्तम ।अपचन, कब्ज आदि ।
भूखउत्तम अति उत्तम, कोई शारीरिक दोष नहीं ।मन्द अस्थिर ।
सामान्यउत्तम साहिष्णुता तथा उत्साह, संक्रमण के प्रति उत्तम अवरोध शक्तिसहिष्णुता तथा उत्साह का अभाव, त्रुटिपूर्ण दाँत, रोग, प्रतिरोध क्षमता का अभाव ।
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