बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

दरिया (दलिया)

personडॉ. प्रेमलता नीलम sourceस्रोत: बुंदेलखंड के व्यंजन की वैज्ञानिकता

गेहूं साफ करके आटा चक्की से दरदरा पिसवाया जाता है । छन्नी तीन प्रकार की होती है महीन, मध्य से थोड़ा दरदरा, तीसरे प्रकार में मोटा दरिया छानकर आता है । छानने के बाद जो आटा बच जाता है उसका प्रयोग रोटी बनाने या हलुआ बनाने या खुरमा बनाने में लिया जाता है। दरिया पौष्टिक होता है बच्चे, युवा, वृद्ध इसका । उपयोग करते ही हैं। रोगी को विशेषकर पथ्य में दिया जाता है । जैसे तपेदिक, मोतीझिरा, मलेरिया आदि रोगों में ।

सामग्री - गेहूं का दरिया, आवश्यकतानुसार नमक, गुढ़, शक्कर, घी, दूध

विधि - दरिया को कढ़ाही में घी के साथ भूनना चाहिए गुलाबी हो जाने के पश्चात् उतार लेवें ।
गंजी में पानी उबलने रखें। एक गिलास दरिया के लिए चार गिलास पानी रखें। उबलने पर दरिया डालें और चलाते जावें । कुकर में समान मात्रा में पानी रखें तीन सीटी में उतार लेवें । लेकिन बिना कुकर के दरिया तैयार होने में 30 मिनिट लगते हैं । रूचि के अनुसार नमक शक्कर या गुढ़ डालें दूध के साथ परोंसे । यदि नमकीन दरिया बनाना है तो प्याज, लहसुन, हरि मिर्च, अदरक हरा मटर का उपयोग करें। बघार लगाकर किसी हुई प्याज, लहसुन, अदरक एवं हरी मिर्च, हल्दी, धनिया पाऊडर का मसाला तैयार करें और उबालते पानी में डालें तीस मिनिट बाद उतार लें । हरी धनिया डालकर परोसें

पौष्टिकता - दरिया पौष्टिक होता है प्रातः नाश्ता के समय, रोगी को चारों समय दिया जाता है। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा की प्राप्ति होती है

क्या इस लेख में कोई त्रुटि है?