बुन्देलखण्ड के व्यंजन में प्रसिद्ध व्यंजन है गकरियाँ इस व्यंजन को हर वर्ग के परिवारों में पसंद किया जाता है । अतः बुन्देली व्यंजन में रोचक, स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन है । नाम से ही ज्ञातव्य होता है कि गकरियाँ अर्थात एक से अधिक में तैयार करना जो गरिष्ठ भोज्य पदार्थ की श्रेणी में आती हैं। एक बार पूर्णतः खाने के बाद शीघ्रता से पुन: भूख नहीं लगती इसलिए विशेष कर किसान वर्ग, मजदूर वर्ग जो शरीरिक श्रम करते हैं उन्हें ज्यादा समय तक कार्य करने की ऊर्जा बनी रहती है । अन्य क्षेत्रों में इसे बाटी भी कहते हैं । लेकिन बुन्देलखण्ड में इसे गकरियाँ ही कहते हैं। हर क्षेत्र में भोज्य सामग्री एक विधि में अन्तर होता है। बुन्देलखण्ड में गोवर से बने 'कण्डे' जिसे 'उप्पल' भी कहते है 'कण्डा' भी कहते है ।
वर्तमान में गैस ओवन, बिजली ओवन होने के कारण परिवर्तन हुआ है । साथ ही स्वाद में अंतर पता चलता है । आजकल विवाह आदि अवसरों पर पिकनिक अर्थात वन भोज में विशेष तौर पर 'गकरियाँ' का उपयोग होता है। इन्हें गकड़ियाँ भी कहा जाने लगा है। गकरियों के साथ "भटा" अर्थात बेंगन, टमाटर आलू का भर्त्ता ही बनाया जाता है साथ में कोई भी चटनी का उपयोग होता जिसकी सामग्री एवं विधि निम्नानुसार है :-
सामग्री - आटा (गेहूं या मिक्चर गेहूं चने का आटा) जिसे बिर्रा कहते हैं। मोन के लिए तेल, स्वादानुसार नमक । आग जलाने के लिए कण्डा एक किलो आटा की गकरियाँ बनाने के लिए दस "कण्डा" आवश्यक है ।
विधि - बड़ी परात (थाली) में आटा रखें तेल का छिड़काव कर आटा मिलावें थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर गूँथ लें। आटा कढ़ा गूंथा जाता है । जिससे लोई बनाना आसान होता है। आटा गूंथ कर थेड़ी देर को फूलने रख दें । फूलने के बाद पुनः आटा गूँथें मसल-मसल कर लोई बनावें रोटी की लोई की अपेक्षा गकरियों की लोई बड़ी होती है । गोल बनाकर दोनों हाथों की हथेली के बीच रखकर हल्के से दबाते जावें । गोल एवं सामान्य आकार देकर । कण्डा की अंगीठी जलाकर जब ऊपर से आग की लपटें समाप्त हो जावें । तब गकरियों को रखें एक साथ दस-बारह गकरियाँ सेंकी जा सकती हैं प्रत्येक मिनिट में पलटते जाइये । ध्यान रहे कि कण्डे की आग तेज न हों धीमी आंच में कम से कम 20-25 मिनिट लगते हैं । गकरियों का भार हल्का लगने पर पूर्णतः सिंक जाती है साफ कपड़े से पोंछते हुए कटोरी में घी में डोबते हुए एक साफ पतीली में ढँक कर रखते जावे । लीजिए गकरियाँ तैयार ।
इसी प्रकार अंगीठी तैयार कर आलू, बेंगन, टमाटर, प्याज, लहसुन भी भर्त कर (पकाकर) साफ पानी में धोकर मसल लेवें सभी का मिक्चर बना लेवें इसी में मिर्च हरा धनिया पत्ती, नमक मिलावें । स्वाद के लिए मौसमी चटनी भी तैयार करें ।
फिर थाली या पत्तल में गकरियाँ, भुरता, चटनी सलाद के साथ परोसें। यह व्यंजन बुन्देलखण्ड का शाही व्यंजन है । वर्तमान में वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध होने पर ओवन का प्रयोग किया जाता है लकिन स्वाद की दृष्टि से देशी पद्धति में ही आनंद प्राप्त होता है। दूसरी विधि गकरियों की बाटी के नाम से जानी जाती है । गकरियाँ की आकृति वैसी ही तैयार कर उबलते पानी में डालते हैं उबल कर पीस ऊपर आ जाती हैं तब उन्हें निकालकर ओवन में रखकर पुनः सेंकते हैं सेंकने के बाद अरहर की दाल मसाले द्वारा तैयार कर भुरता चटनी के साथ सेवन किया जाता है ।
अन्य संस्कृति के बदलाव के साथ व्यंजन में भी परिवर्तन देखने मिलता है । किन्तु पौष्टिकता के आधार पर प्राचीन परम्परागत व्यंजन ही कैलोरी प्रदान करते हैं ।