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गुलगुला

personडॉ. प्रेमलता नीलम sourceस्रोत: बुंदेलखंड के व्यंजन की वैज्ञानिकता

चंदेलकाल में गुलगुला का प्रचलन हुआ था, राजसी शाही व्यंजन माना गया। वर्तमान में गुलगुला प्रचुर मात्रा में प्रचलित हैं हर वर्ग हर समाज में गुलगुला गुलगुला पकाये जाते हैं यह पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन है। बुन्देलखण्ड में अधिकतर समाज में देवी देवता के भोग प्रसाद के रूप में उपयोग किया जाता है ।

सामग्री - गेहूँ का आटा, गुड़ सौंठ पाऊडर, तेल ।

विधि - गुड़ कुचलकर पानी में फूलने रखें, पानी में घुल जाने के बाद छन्नी से छान लेवें। गहरी परांत में आटा रखें आधा किलो आटा में एक चम्मच सौंठ पाऊडर डालें छना हुआ गुड़ पानी आटा में डालते हुए फेंटते जावे भजियानुमा पेस्ट तैयार कर लेवें । दो घन्टे के लिए फूलने रख देवें ऐसा करने से गुलगुला तेल में तलने से फूल जाते हैं । दो घन्टे बाद पुनः भली भाँति फेंट लेवें तत्पश्चात् भजिया की तरह कढ़ाही में तेल गरम कर तलते जावें । विविध आकृतियों के गुलगुला तैयार होते हैं इसे बच्चे ज्यादा पसंद करते हैं। गरम से ज्यादा ठण्डे होने पर स्वादिष्ट लगते हैं ।

पौष्टिक तत्व - प्रोटीन, आयरन, वसा ।

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