रायता - बुन्देलखंड के व्यंजनों में रायता का महत्वपूर्ण स्थान है । खाना थाली में यदि रायता नहीं है तब खाना थाली अपूर्ण है खासतौर पर पुड़ी यदि भोजन में है तब रायता का होना अति आवश्यक है । पुड़ी रायता में डोबकर या मीढ़कर बुन्देलखण्ड के व्यक्ति जरूर ग्रहण करते हैं। रायता मठा से तैयार होता है जिसमें पोषक तत्वों की उपस्थिति विद्यमान होती है। बुन्देली वैवाहिक कार्यक्रमों में रायता अनिवार्यतः होता है । "पंगत" अर्थात समूह में जमीन पर बैठकर खाना पंगत कहलाता है पत्तल दोना में भोजन परोसा जाता दोनों में दाल एवं रायता अलग-अलग रखते हैं तब महिलाएं हंसी मजाक के मूड में अतिथियों के सम्मान में गारी गाते हुए कहती हैं "बिन न्योते आये जबलपुर बारे दोना काये ने लाये जो "रायतो" बगर गओ" । कहने का तात्पर्य है कि रायता का मठा पतला होता है और दोनानुमा कटोरी भी नाजुक होती है उसमें रायता डालते ही कभी-कभी पत्तल से गिर जाता है तब महिलायें हंसी उड़ाती हैं । रायता ऐसा व्यंजल है जिसका कोई समय नहीं होता भोजन में कभी भी परोसा जाता है । रायता कई प्रकार से पकाया जाता है । बूंदी का रायता, लौकी रायता, ककड़ी रायता, फ्रूट रायता, सादा रायता, बुन्देलखंड में प्रचलित है ।
सामग्री - बेसन, मठा, नमक, मिर्ची, हल्दी, राई, जीरा, हींग, हरा धनिया पत्ती, तेल आवश्यकतानुसार ।
विधि - सर्वप्रथम बेसन को पानी के साथ घोल लेवें । कढ़ाई में तेल डालकर सेब बनाने के छन्ना से बुंदी सेंककर रखें । दूसरे बर्तन को आंच पर रखें थोड़ा तेल डालें समस्त मसाले डाल देवें तुरंत मठा डालें और बुंदी डालकर ढक्कन से ढांक कर आंच से उतार लेवें । दस मिनिट तक ढका रहने दें फिर महीन धनिया पत्ती डालकर कटोरी में परोसकर खाना के साथ खायें ।
पौष्टिकता - बेसन - प्रोटीन, मठा - बसा रहित, हल्दी, हींग, जीरा, मिर्च- खनिज तत्व, नमक - आयोडीन
हल्दी एन्टीबाइटिक होती है जो शारीरिक क्षमता को ऊर्जा प्रदान करती है मनुष्य को बाहरी इंफेक्शन से बचाती है। इसलिए प्रत्येक सब्जी में हल्दी का उपयोग आवश्यक माना गया है । हल्दी वनस्पतिक वृक्ष की उपज है जो गाठनुमा होती है पीसने पर स्वादहीन होते हुए रंग पीला होता है और शारीरिक सौंदर्य की क्षमता बढ़ाती है ।