बुन्देलकाल से प्रचलित हैं "खड़बरा" लोकभोज्य पथ्य है यह व्यंजन । बुन्देलखण्ड के प्रत्येक जनपद का सर्वोत्तम आंचलिक लोक व्यंजन की श्रेणी में दर्ज है आज भी अधिकांश जनपदों में मान्य है त्यौहारों एवं अन्य अवसरों में निश्चित तौर पर "खड़बरा" मिष्ठान के रूप में बनाया जाता है। यह मिष्ठान रसगुल्ला और बरफी की तरह मिठास लिए हुए होता है। बुन्देलकाल का शाही मिष्ठान हे "खड़बरा"। इस काल में यह व्यंजन ज्योनार (पंगत) में परोसा जाता था ।
सामग्री - गेहूँ का आटा, चीनी, घी, मेवा, चिरौंजी, इलायची, किशमिश गरी आदि ।
विधि - सर्वप्रथम आटे को पानी में घोलें फिर घोल को कढ़ाई में डालकर धीमी आँच पर रख देवें झरिया से चलाते जावें । कम से कम पन्द्रह मिनिट तक घोल को आँच पर रखें जैसे ही गाढ़ा होने लगे हलुआनुमा तब कढ़ाई आँच से नीचे उतार लेवें । ठण्डा होने पर छोटी छोटी टिकिया हथेली से दबाकर बनायें । अब कढ़ाई में घी डालें आँच पर रखकर धीमी आँच पर सेंके । तलने के बाद शक्कर की चासनी को तैयार कर उसमें टिकिया डाल देवें पांच दस मिनिट से निकाल लेवें इसके ऊपर मेवा महीन करके डाल देवें लीजिए खड़बरा तैयार प्लेट में रखकर सर्व करें
पौष्टिकता - गेहूँ - प्रोटीन, कार्बोज, शक्कर - कार्बोहाइड्रेट, मेवा एवं घी-वसा ।