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बुंदेलखंड विश्वकोश

विटामिन एवं खनिज लवण आपूर्ति

personडॉ. प्रेमलता नीलम sourceस्रोत: बुंदेलखंड के व्यंजन की वैज्ञानिकता

हरी पत्तेदार सब्जियाँ - बुन्देलखण्ड में हरी पत्तेदार सब्जियों का उत्पादन अपार है जिनमें समस्त खनिज लवण एवं विटामिन्स पाये जाते हैं। पालक, मैथी, चौंरई (चौलाई भाजी) बथुआ, बरेंजो की भाजी, नोरपा एवं राजगिर की भाजियाँ । समस्त हरी सब्जी जैसे (भिण्डी) बुन्देली में भेड़ा, तुरइया, फतकुली (गिल्की), बरवटी, मटर फल्ली, गमार फल्ली, भटा, टमाटर, करेला, गोभी, मूली, लौकी, कुमड़ा, घुइयाँ, तूमा आदि ।

पीले तथा संतरी फल एवं सब्जियाँ

  • आम, पपीता, गाजर, कद्दू, संतरा, केला, चीकू आदि

विटामिन सी अधिकता वाले फल तथा सब्जियाँ

  • आँवला, अमरूद, नींबू, संतरा

पेय पदार्थ

  • आम का पना (शरबत), इमली का पना, जीरा का पना, नींबू का पना (शरबत) गाजर, तरबूज, खरबूजा, बेल, चीपू का शरबत संतरा, अनार का शरबत वर्तमान में प्रचलित है ।

भोजन ग्रहण करने के पूर्व पौष्टिक सूप (जूस)

भोजन के पहिले सूप अर्थात जूस लेने से भोजन पाचन योग्य हो जाता है जाता है यह ध्यान रखा जावे की तेल मसालों की मात्रा अधिक न हो । स्वाद के अनुसार काली मिर्च, हरी या लाल मिर्च, जीरा, नमक का उपयोग किया जावे । सूप निम्न होते हैं- टमाटर, सूप, लौकी, गाजर, पत्तागोभी, मक्का जौ दाना का उपयोग किया जाता है। मिक्स सब्जियों का सूप भी तैयार किया जाता है जिसमें अधिक पौष्टिक तत्व की मात्रा होती है ।

बुन्देली व्यंजन में सभी प्रकार के पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जिसे मौसम, जलवायु, आयु, लिंग, कार्य के अनुरूप उपयोग किये जाते हैं यदि खाद्य पदार्थों के रखरखाव के साथ भोजन पकाने की उचित विधि का उपयोग नहीं किया तब पौष्टिक आहार भी विषाक्त हो जाता है। आवश्यकता है मुखिया एवं गृहिणी को ज्ञान एवं शिक्षा की बुन्देली बहुत से खाद्य पदार्थ-मौसम से हटकर बिना संरक्षण के तत्वहीन हो जाते हैं और विषाक्त हो जाते हैं। जैसे "कुदई" ऐसा अन्न है जिसका रख रखाव सही न होने पर इससे बने व्यंजन एक समय बाद विषाक्त हो जाते है नमी के कारण जीवाणु पनपते हैं और खाद्य सामग्री खराब हो जाती है। "कुदई" के लड्डू विशेष बनते हैं चावलनुमा भी तैयार किए जाते हैं जिसे दाल या कढ़ी के साथ खाया जाता है। यदि "कुदई" की देखभाल नहीं की गई तब इससे बने व्यंजन खाने से लोगों की मृत्यु भी हो जाती है। इसलिए खाद्य सामग्री का रख रखाव भी आवश्यक है। बुन्देलखण्ड के गाँव में पहिले कुठियां, बण्डा बना दिए जाते थे जो रेफ्रिजरेटर का काम करते थे । अशिक्षितता के कारण कभी-कभी गाँव के लोग इक्ट्ठा आटा, बेसन, पिसवा कर रख लेते थे कारण ये होता था कि इस समय विज्ञान की तरक्की इतनी नहीं थी की घर में जातें (चक्की पत्थर की गोल गोल) हुआ करते थे यह कार्य पीसने का महिलायें करती थीं धीरे-धीरे चक्की का प्रचलन हुआ तब इकट्टा पिसवाकर रख लिया जाता था उस आटे और बेसन में जीवाणु उत्पन्न हो जाते थे स्वाद एवं रंग बदल जाता था, अज्ञानता एवं आलस्यता के कारण उसी खाद्य आटे को छानकर उपयोग करने से विविध बीमारियाँ जन्म लेती थी । यह कृत्य गाँव के नागरिकों में होता था । शनैः शनैः शिक्षा का प्रचार-प्रसार हुआ और जनता में जाग्रति आई । खाद्य संरक्षण की विधि से अवगत हुए जिससे घरेलु स्तर की विधियों से खाद्य सामग्री का रख रखाव किया जाने लगा |

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