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दीमान देशपत सिंह बुन्देला

दीमान देशपत सिंह बुन्देला

छतरपुर के दीमान देशपत बुन्देला ने 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण सहयोग देने के साथ-साथ तात्या टोपे एवं वीरांगना लक्ष्मीबाई की हर संभव मदद की थी। देशपत जी के भय से सारे अंग्रेज दहशत में थे। देशपत को पकड़वाने के लिये ब्रिटिश सरकार ने 5000 रुपये का इनाम रखा। मुखबिरी से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर 03 दिसम्बर, 1862 को नौगाँव से कुछ मील दूर दीमान देशपत बुन्देला की हत्या कर दी गई।

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