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बुंदेलखंड विश्वकोश

अन्य पदार्थों का संरक्षण

personडॉ. प्रेमलता नीलम sourceस्रोत: बुंदेलखंड के व्यंजन की वैज्ञानिकता

आदिकाल से ही मानव में भोजन का प्रमुख स्थान रहा है, किन्तु जैसे-जैसे मनुष्य का जीवन बेहतर होता गया मानव ने भोजन को भविष्य में कठिन समय के लिए सुरक्षित करने के बारे में सोचना प्रारंभ किया इसी सोच ने खाद्य संरक्षण (फ्रूट प्रिजर्वेशन) को जन्म दिया । प्राचीनकाल में भोज्य पदार्थों का संरक्षण धुएँ के प्रयोग सूखा कर किया जाता था । समय बीतने के साथ-साथ नमक बर्फ तथा एवं धूप में शक्कर के गाढ़े घोलों द्वारा भोज्य पदार्थों को सुरक्षित रखने की विधियाँ विकसित हुई । फल, सब्जियाँ, खाद्य सरंक्षण की आधुनिक ढंग से शुरूआत 18वीं शताब्दी में हुई । इसके पूर्व 9वीं से 17वीं शताब्दी तक स्वजान से रखरखाव किया जाता था । सन् 1795 में फल तथा सब्जियों को बंद डिब्बों में रखकर संरक्षित करने का प्रयास किया गया यह कार्य सर्वप्रथम "निकोलस एयर्ट" ने किया ।

हमारे यहाँ फल एवं खाद्य संरक्षण की शुरूआत सन् 1934 में लायलपुर में हुई । तत्पश्चात् क्वेटा में 1938 में कार्य किया गया कुछ समय पश्चात् खाद्य संरक्षण पर अनुसंधान मैसूर में प्रारंभ हुआ । तात्पर्य यह है कि उपयुक्त माध्यम से बुन्देलखण्ड में भी खाद्य संरक्षण की विधियों का प्रयोग किया गया जिससे खेतीहर किसानों को व्यापारिक जगत् को इसका भरपूर लाभ प्राप्त हुआ है "खाद्य पदार्थ को उसकी किस्म बिना खराब हुआ अधिक समय तक सुरक्षित रखने को ही खाद्य संरक्षण कहते हैं।"

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